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ड्रिप सिस्टम

ड्रिप सिस्टम क्या होता है- ड्रिप विधि सिंचाई करने की एक आधुनिक विधि है जो कि विश्व के लगभग सभी देशों में अपनाई जा रही है|आज के आधुनिक दौर में जहां खेती करने में लगे संसाधनों ( जैसे की खाद दवा सिंचाई मजदूरी रखरखाव) के दाम दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं, ऐसे में हम ड्रिप का उपयोग करके उन संसाधनों के उपयोग में कमी लाने के साथ-साथ अपने फसल को डेढ़ से 2 गुना तक बढ़ा सकते हैं.

ड्रिप सिस्टम कैसे काम करता है-
ड्रिप विधि से सिंचाई करने के लिए पानी को पंप द्वारा ड्रिप सिस्टम में जोड़ा जाता है, जहां पर पानी को सैंड फिल्टर की सहायता से फिल्टर किया जाता है, जिससे कि बालू या रेत को अलग कर दिया जाता है उसके बाद पाइप लाइन में लगे ड्रिपर की सहायता से पानी को प्रत्येक पौधे के जड़ के नीचे बूंद बूंद तरीके से निश्चित समय के लिए निश्चित मात्रा में दिया जाता है जिससे कि प्रत्येक पौधे को समान मात्रा में एक समान समय तक सिंचाई किया जाता है. ड्रिप सिस्टम में लगे फ़र्टिलाइज़र टैंक में दवा खाद या कोई और कीटनाशक घोल दीया जाता है और समय-समय पर जरूरत के हिसाब से उस टैंक द्वारा कीटनाशक खाद और दवा ड्रिप लाइन के द्वारा पूरे पौधों में समान मात्रा में दिया जाता है इससे प्रत्येक पौधे को समान मात्रा में खाद कीटनाशक दवा और पोषक तत्व प्राप्त होते हैं इससे सभी पौधों का समान रूप से विकास होता है.

ड्रिप विधि से किन फसलों की सिंचाई किया जाता है- ड्रिप विधि पिचाई की एक बेहद ही कामयाब पद्धति है जिसको सभी विकसित देशों ने अपनाया हुआ है. ड्रिप विधि फलों जैसे कि आम आंवला लीची अमरुद नींबू वर्गीय फल बेल केला पपीता इत्यादि एवं सब्जी जैसे कि टमाटर भिंडी बैंगन खीरा लोकी शिमला मिर्च मिर्च मोरिंगा और गन्ना इत्यादि की सिंचाई किया जाता है. इसके अलावा कोई भी फसल जो एक निश्चित दूरी पर उगाई जाती है उसमें भी ड्रिप का प्रयोग किया जाता है

ड्रिप विधि से सिंचाई के फायदे- ड्रिप विधि से सिंचाई करने से पानी के बारे में 70 परसेंट तक कमी ला सकते हैं और दवा खाद कीटनाशक मजदूरी में होने वाले खर्चों को 75 परसेंट तक कम कर सकते हैं तथा ड्रिप विधि से सिंचाई करने पर डेढ़ से दोगुना तक की पैदावार को प्राप्त कर सकते हैं.